‘लगान’ के देवा और ‘गजनी’ के खतरनाक विलेन के तौर पर मशहूर हुए प्रदीप रावत लंबे समय से बीमार चल रहे थे, मंगलवार शाम मुंबई के अस्पताल में उनका निधन हुआ।
NEED TO KNOW
- दिग्गज अभिनेता प्रदीप सिंह रावत का मंगलवार शाम मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में 74 साल की उम्र में निधन हो गया, वे लंबे समय से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे।
- प्रदीप रावत ‘लगान’ में देवा, ‘गजनी’ में गजनी धर्मात्मा और टीवी सीरियल ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा के किरदार के लिए खास तौर पर याद किए जाते हैं, जिसके लिए उन्हें साल 2004 में तेलुगु फिल्म ‘सिंहा (Sye)’ में सर्वश्रेष्ठ विलेन का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था।
- अभिनेता के मैनेजर सिद्धार्थ आर तिवारी ने उनके निधन की पुष्टि की, वहीं उनके ‘लगान’ के सह-कलाकार यशपाल शर्मा समेत फिल्म इंडस्ट्री के कई सितारों ने सोशल मीडिया पर शोक जताया।
मुंबई के फिल्म और टीवी जगत में एक और सितारे का साया छिन गया है। हिंदी, तेलुगु और तमिल सिनेमा में अपनी दमदार मौजूदगी के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ अभिनेता प्रदीप सिंह रावत का मंगलवार, 4 अगस्त 2026 की शाम मुंबई में निधन हो गया। वे 74 साल के थे और लंबे समय से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से पूरे फिल्म उद्योग में शोक की लहर दौड़ गई है।
प्रदीप रावत के निधन की पुष्टि कैसे हुई
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में अभिनेता के मैनेजर सिद्धार्थ आर तिवारी ने बताया कि प्रदीप रावत बीते करीब एक महीने से मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती थे। हाल ही में उन्हें भिवंडी स्थित एक कैंसर अस्पताल में शिफ्ट किया गया था, जहां इलाज के दौरान मंगलवार शाम उन्होंने आखिरी सांस ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे अपने पीछे पत्नी कल्याणी रावत और बेटे विक्रमादित्य रावत को छोड़ गए हैं।
खबर सामने आते ही उनके करीबी दोस्त और ‘लगान’ के सह-कलाकार यशपाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, “प्रदीप रावत, हमारे लगान के गजनी देवा। RIP.” अभिनेता गजेंद्र चौहान ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा फिल्म इंडस्ट्री के कई और कलाकारों और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
टेलीविजन से हुई थी करियर की शुरुआत
प्रदीप सिंह रावत का सफर टेलीविजन से शुरू हुआ था। बी.आर. चोपड़ा के मशहूर धारावाहिक ‘महाभारत’ (1988) में उन्होंने अश्वत्थामा की भूमिका निभाई थी, जिसने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। इस भूमिका ने उनके करियर की मजबूत नींव रखी और आगे चलकर उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कदम रखा।
‘गजनी’ और ‘लगान’ से मिली असली पहचान
प्रदीप रावत की सबसे यादगार भूमिका तमिल फिल्म ‘गजनी’ (2005) में गजनी धर्मात्मा की रही, जिसमें उन्होंने डबल रोल निभाया था। इसी किरदार को उन्होंने 2008 में आमिर खान की सुपरहिट हिंदी रीमेक में भी दोहराया, जो आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे खौफनाक विलेन किरदारों में गिना जाता है।
लेकिन प्रदीप रावत सिर्फ खलनायकी तक सीमित नहीं रहे। साल 2001 में आई ऑस्कर के लिए नामांकित हो चुकी स्पोर्ट्स ड्रामा ‘लगान’ में उन्होंने देवा नाम के वफादार सिख सिपाही का किरदार निभाया, जिसने दर्शकों का दिल जीत लिया। यह भूमिका साबित करती है कि वे नकारात्मक और सकारात्मक, दोनों तरह के किरदारों में समान रूप से सहज थे।
दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी छोड़ी गहरी छाप
हिंदी सिनेमा के अलावा प्रदीप रावत ने दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बनाई। एस.एस. राजामौली की 2004 की तेलुगु ब्लॉकबस्टर ‘सिंहा (Sye)’ में भिक्षु यादव के किरदार के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ विलेन का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। इसके अलावा वे तेलुगु फिल्म ‘नायक’ और अन्य कई प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रहे। उनकी फिल्मोग्राफी में ‘सरफरोश’, ‘रावडी राठौर’ जैसी हिंदी फिल्में भी शामिल हैं, जिनमें उन्होंने दमदार खलनायकी से दर्शकों को प्रभावित किया।
अपने लंबे करियर में प्रदीप रावत ने कन्नड़ फिल्म ‘पैरोडी’ से कन्नड़ सिनेमा में, मलयालम फिल्म ‘चाइना टाउन’ से मलयालम सिनेमा में, बंगाली फिल्म ‘हीरो 420’ से बंगाली सिनेमा में और भोजपुरी फिल्म ‘क्रैक फाइटर’ से भोजपुरी सिनेमा में भी शुरुआत की थी। यानी उन्होंने लगभग हर बड़ी भारतीय भाषा के सिनेमा में अपनी छाप छोड़ी।
हाल की फिल्मों में भी दिखी मौजूदगी
अपने आखिरी दौर में भी प्रदीप रावत परदे पर सक्रिय रहे। उनकी सबसे हालिया उल्लेखनीय फिल्म विक्की कौशल स्टारर ‘छावा’ रही, जिसमें उन्होंने यशजी कांक का किरदार निभाया था। इस फिल्म ने दिखाया कि उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी अभिनय क्षमता में कोई कमी नहीं आई थी।
पर्दे पर खलनायक, असल जिंदगी में विनम्र इंसान
प्रदीप रावत भले ही परदे पर अपनी डरावनी और दमदार आवाज के लिए मशहूर रहे हों, लेकिन उनके साथ काम कर चुके कलाकार अक्सर उन्हें सेट के बाहर एक शांत, विनम्र और मिलनसार इंसान बताते रहे हैं। उनकी ऊंची कद-काठी, गहरी आवाज और तीव्र अभिनय शैली ने उन्हें अलग-अलग भाषाओं के निर्देशकों की पहली पसंद बना दिया था।
आगे क्या
अभी तक प्रदीप रावत के अंतिम संस्कार की आधिकारिक तारीख और स्थान को लेकर परिवार की ओर से पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, हालांकि रिपोर्ट्स के अनुसार अंतिम संस्कार बुधवार को होने की उम्मीद है। जैसे ही परिवार की ओर से इस बारे में आधिकारिक बयान आता है, यह खबर अपडेट की जाएगी। फिलहाल पूरा फिल्म उद्योग और उनके प्रशंसक इस अपूरणीय क्षति पर शोक व्यक्त कर रहे हैं और उनके करियर की उन यादगार भूमिकाओं को याद कर रहे हैं, जिन्होंने कई पीढ़ियों के दर्शकों को प्रभावित किया।
प्रदीप सिंह रावत का निधन कब हुआ?
प्रदीप सिंह रावत का निधन मंगलवार, 4 अगस्त 2026 की शाम मुंबई में हुआ।
प्रदीप रावत की मृत्यु का कारण क्या था?
वे लंबे समय से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे, जिसके इलाज के दौरान उनका निधन हुआ।
प्रदीप रावत की उम्र कितनी थी?
निधन के समय प्रदीप रावत 74 साल के थे।
प्रदीप रावत किन फिल्मों के लिए मशहूर थे?
वे ‘लगान’, ‘गजनी’, ‘सरफरोश’ और तेलुगु फिल्म ‘सिंहा (Sye)’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते थे, साथ ही टीवी सीरियल ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा के किरदार के लिए भी मशहूर थे।
प्रदीप रावत अपने पीछे परिवार में किसे छोड़ गए हैं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे अपने पीछे पत्नी कल्याणी रावत और बेटे विक्रमादित्य रावत को छोड़ गए हैं।





